dear...
अगर मैं तेरा आसमान नही
तो कोई बात नही
मुझे अपनी ज़मीन बनाकर
अपने पैर टिका ले
भले ही आसमान को तू छू न सके
तेरे पैरों की ज़मी हिलने नही दूंगी
तुझे डगमगाने नही दूंगी
ये वादा है मेरा....
अगर मैं तेरी मंजिल नही
तो कोई बात नही
मुझे अपना रास्ता ही बना ले
हर कदम तेरे साथ चलूंगी
तेरी हमसफ़र बनकर और
तेरी मंजिल से तुझे मिलाने से पहले
तेरा साथ नही छोडूंगी
ये वादा है मेरा....
अगर मैं तेरे जीवन की रौशनी नही
तो कोई बात नही
मुझे अपनी जिंदगी की स्याही बना ले
खुली आंखों से रौशनी में जी ले
जब आँखें थक कर बंद होंगी
तो तू अकेला नही होगा
मैं ही मैं दिखूंगी तुझे
ये वादा है मेरा....
अगर मैं तेरी खुशी नही
तो कोई बात नही
आंसू का कतरा बनाकर
पलकों में छुपा ले
जब खुशी तुझसे रूठेगी
तब तेरे सारे ग़मों को साथ ले
मैं बह निकलूँगी
ये वादा है मेरा.....
Wednesday, June 11, 2008
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20 comments:
बहुत सुंदर!!
जब खुशी तुझसे रूठेगी
तब तेरे सारे ग़मों को साथ ले
मैं बह निकलूँगी
ये वादा है मेरा
--क्या बात है, वाह!
bahut acchee..... bahut sundar
behad khubsurat jazbat,badhai
बहुत ही सुंदर.
प्यार भरे भाव से ओत-प्रोत रचना के लिए आभार.
आपकी यह नज्म अच्छी लगी, कुछ पंक्तियां इसी संदर्भ में -
तिरा सफर ही मंजिल है मेरी
आ मुझसे गुजर तू
औ मंजिल को चली जा ...
जब खुशी तुझसे रूठेगी
तब तेरे सारे ग़मों को साथ ले
मैं बह निकलूँगी.
बहुत अच्छे !
मर्म स्पर्शी !
=============
डा.चन्द्रकुमार जैन
जब खुशी तुझसे रूठेगी
तब तेरे सारे ग़मों को साथ ले
मैं बह निकलूँगी
ये वादा है मेरा
bahut khuub likha hai..
आहा काश ऐसी चाहने वाली सबको मिले......बहुत खूब....आज अंदाज कुछ अलग है......
बहुत अच्छे
नवी आचार्य
अगर मैं तेरी खुशी नही
तो कोई बात नही
आंसू का कतरा बनाकर
पलकों में छुपा ले
जब खुशी तुझसे रूठेगी
तब तेरे सारे ग़मों को साथ ले
मैं बह निकलूँगी
ये वादा है मेरा.....
बहुत ही अलग अंदाज़ है पल्लवी जी,यकीन करें दिल को छू गया...
thnaks for ur comments and it is such a beautiful blog. i got a chance to read it:)
Ur style of expression is simple par it touchs the heart!!
:)
मुझे अपनी जिंदगी की स्याही बना ले
खुली आंखों से रौशनी में जी ले
जब आँखें थक कर बंद होंगी
तो तू अकेला नही होगा
Tariif se badhkar hai...badhaayee..
bhut sundar. likhati rhe.
मैने आज तक बहुत ग़ज़ले, कविताए लिखी, मगर एसी रचना नही बनी
अच्छी रचना के लिए बधाई
क्या बात है,वाह बहुत सुंदर.
ख़ुशबू बिखेरती हुई नज़्म है!
तारीफ के लिये शब्द नहीं मिल रहे बस एक शब्द में कहूँ तो "बेहतरीन"
bahut accha likha hai
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