कितना संगदिल हूँ मैं
आज बेटे ने तोड़ दिया
एक कीमती वास और...
मैं डांट बैठा उसे
ये भी न कह पाया की
बेटा...कोई बात नहीं
अब सोचता हूँ
कितना आसमान सा दिल था तुम्हारा
मैं तुमसे वफ़ा न कर सका
और याद है मुझे आज भी
जब सुनाया था मैंने तुन्हे
अपना फैसला...
कुछ पल खामोश रही तुम
और कितनी आसानी से कह गयी
कोई बात नहीं......
Monday, April 28, 2008
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1 comment:
itis nice that u r taking time out for ur creativity n penning ur thoughts....congratulations..
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