शब की नर्म गोद में
पलकों के महफूज़ साए में
सोये हुए कुछ नन्हें ख्वाब
लेते हैं एक अंगडाई और
फैलाकर अपनी बाहें
ले लेते हैं मुझे अपने आगोश में
रात भर थपकी देते हैं
अपनी नन्ही हथेलियों से
बुनते हैं रेशमी ख्यालों के धागे
दिन भर की उलझनों से थकी मैं
खो जाती हूँ इन ख्यालों में
और जीती हूँ
कुछ बेहद रूमानी लम्हे
कुछ अनकही ख्वाहिशें
कुछ भीगी भीगी यादें
कुछ खुशबू में लिपटे एहसास
पता नहीं कब ,थककर
ये ख्वाब भी अलसाने लगते हैं
और धीरे से सो जाते हैं
एक के ऊपर एक गिरकर
तब,सुबह की पहली ओस के साथ
मैं जागती हूँ और
मीठी सी खुमार भरी आवाज़ में
कहती हूँ...
शुक्रिया मेरे ख्वाबो
हकीकत हर दिन मुझे क़त्ल करती है
और तुम....
हर शब मुझे जिंदा कर देते हो..
Saturday, April 26, 2008
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2 comments:
वाह...... वाह ..... पल्लवी जी ..वाह वाह
क्या खूब कहा है ।
हकीकत से कत्ल होना और ख्वाब से जिंदा .........
बस यही तो दौलत है अपने पास और इसीलिए ,
" देख हम फिर जला रहे हैं चिराग ,
ऐ हवा ! हौसला निकाल अपना "
अच्छी बात , बड़ी बात , बेहतरीन नज्म ...
बधाई !!
Too good ! Everytime I read it I enjoy it with a refreshing newness.
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