मई की एक दोपहर
सिर पर सवार सूरज
बेचैन कर देने वाली हवाएं
बोझा ढोते कुछ मजदूर
बैठ गए हैं थककर और
खोल ली है अपनी पोटली
जिसमे से निकली हैं कुछ मोटी रोटियाँ
साथ में प्याज और अचार
उनके बतियाने और हँसने की आवाज़ से
गूँज उठा है आसमान...
उधर ए.सी. कमरों में बंद
कुछ अमीर उद्योगपति
लीन हैं गहन चर्चा में
पेशानी पर बल,हाथों में फाइलें
और...चर्चा का विषय है
'तनाव प्रबंधन'
Saturday, April 26, 2008
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1 comment:
आश्चर्य है "तनाव प्रबंधन" पर सबसे अधिक कमेंट्स होने चाहिए थे पर उस पर एक भी नहीं या शायद मुझे ही कविता की समझ नहीं. आपकी सारी रचनाओं में सबसे सुंदर "तनाव प्रबंधन"
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