आओ तुम्हे अपना बना लूं
चांदनी से चुरा कर थोडा सा उजाला
तुम्हारी सूरत को निहारूं
धरती से मांगकर थोडी सी हरियाली
तुम्हे चुनरी पहना दूं
इन्द्रधनुष से कुछ रंग उधार ले
गुलाल बनाऊं
तुम्हारे साथ होली मना लूं
बारिश के छींटे मिटटी पर गिराकर
तुम्हारे लिए इत्र बना दूं
गुलमोहर से इसरार कर
उसके फूलों में अपनी मोहब्बत मिलाऊँ
तुम्हारे रास्ते में बिछा दूं
बादलों तक जाऊ
अपने अश्कों को उन पर रख आऊं
तुम पर बरसाऊँ
कुछ तारे तोड़ लाऊँ
तुम्हारे दामन में डाल दूं
तुम्हारी सारी ख्वाहिशों कों
अपने ख़्वाबों में घोल दूं
एक नयी दुनिया बनाऊं
अगर तुम हाँ कर दो तो
तुम्हारे सारे ग़म अपने नाम कर लूं
अपने हिस्से की खुशियों से
तुम्हारे जीवन कों संवार दूं
पाकीजा तावीज़ बना के
तुम्हे अपने सीने से लगा लूं
आओ तुम्हे अपना बना लूं....
Saturday, April 26, 2008
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